विजया एकादशी व्रत कथा · Vijaya Ekadashi Vrat Katha
समुद्र पार न कर पा रहे श्रीराम को ऋषि बकदाल्भ्य ने विजया एकादशी का व्रत कैसे बताया, और उन्हें विजय कैसे मिली, प्रकाशित रूपों से हमारे शब्दों में।
कथा (हमारे शब्दों में)
एक बार नारद जी ने ब्रह्मा जी से फाल्गुन कृष्ण पक्ष की एकादशी के बारे में पूछा। ब्रह्मा जी ने कहा कि इसका व्रत पुराने और नए पापों का नाश करता है और निश्चय ही विजय दिलाता है, और यह कथा सुनाई।
त्रेता युग में जब श्रीराम लंका पर आक्रमण के लिए सेना सहित समुद्र तट पर पहुँचे, तो उन्हें जलचरों से भरा गहरा समुद्र पार करने का कोई उपाय न सूझा। उन्होंने लक्ष्मण जी से पूछा कि इसे कैसे पार करें। लक्ष्मण जी ने बताया कि आधा योजन दूर कुमारी द्वीप में प्राचीन मुनि बकदाल्भ्य रहते हैं, और श्रीराम उनसे उपाय पूछें।
श्रीराम मुनि के आश्रम गए और उन्हें प्रणाम किया। मुनि के आने का कारण पूछने पर श्रीराम ने बताया कि वे सेना सहित लंका जा रहे हैं, और समुद्र पार करने का उपाय पूछा। बकदाल्भ्य मुनि ने उन्हें विजया एकादशी का व्रत करने को कहा, जिससे वे निश्चय ही विजयी होंगे और समुद्र पार कर लेंगे।
उन्होंने विधि बताई: एक दिन पहले सोने, चाँदी, ताँबे या मिट्टी का कलश जल से भरकर, नए पत्तों के साथ स्थापित करें, और उस पर सप्तधान्य और जौ के साथ नारायण की स्वर्ण-प्रतिमा रखें। एकादशी को धूप, दीप, नैवेद्य और नारियल से पूजा करें; दिन भर कलश के सामने बैठें और रात को वहीं जागरण करें। द्वादशी को कलश ब्राह्मण को दान करें।
श्रीराम ने मुनि के बताए अनुसार विजया एकादशी का व्रत किया, और उसके प्रभाव से विजय पाई। ब्रह्मा जी ने कहा कि जो विधिपूर्वक यह व्रत करता है, उसे इस लोक और परलोक में विजय मिलती है, और इसकी कथा पढ़ने या सुनने से वाजपेय यज्ञ का फल मिलता है।
यह कथा यहाँ केवल हमारे शब्दों में दी गई है: प्रकाशित रूप इसे अलग-अलग शब्दों और विवरणों के साथ कहते हैं, और इसका कोई मूल पाठ हमने नहीं मिलाया है। इसकी हर बात नीचे दिए गए कम से कम दो प्रकाशित रूपों में मिलती है।
इस पाठ के बारे में
विजया एकादशी फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी है (पूर्णिमांत पंचांग के अनुसार; अमांत पंचांग में यह माघ मास के कृष्ण पक्ष में आती है)। इसकी कथा उस शृंखला का भाग है जिसमें हर एकादशी की महिमा बताई जाती है, प्रायः श्रीकृष्ण के पांडवों को दिए उत्तर के रूप में।
प्रकाशित रूप हिंदी गद्य में हैं और उनके शब्दों तथा कुछ नामों और विवरणों में अंतर है। ऊपर दी गई कथा में केवल वही बातें हैं जिन पर नीचे दिए गए कम से कम दो रूप सहमत हैं। इस वर्ष की तिथि के लिए एकादशी देखें।
पाठ कैसे किया जाता है
कथा विजया एकादशी के दिन विष्णु भगवान की पूजा के अंग के रूप में पढ़ी या सुनी जाती है। परंपराएँ परिवार और क्षेत्र के अनुसार अलग होती हैं।
और पढ़ें: विष्णु
और व्रत कथाएँ
स्रोत और जाँच
- तुलना किए गए संस्करण
- कथा के स्रोत
- विजया एकादशी व्रत कथा, Bhakti Bharat
- विजया एकादशी व्रत कथा, Shubh Panchang
- पाठ की जाँच
- सनातनवाणी संपादकीय प्रक्रिया
- अंतिम जाँच
परिवर्तन सूची
- : प्रकाशित। इस पृष्ठ पर दिए गए प्रकाशित रूपों से हमारे शब्दों में लिखी कथा (संपादकीय नीति देखें)।