आमलकी एकादशी व्रत कथा · Amalaki Ekadashi Vrat Katha

एक पापी बहेलिये की कथा, जिसने संयोग से आमलकी एकादशी का रात्रि-जागरण किया, और जो राजा वसुरथ के रूप में जन्म लेकर शत्रुओं से बचा, प्रकाशित रूपों से हमारे शब्दों में।

कथा (हमारे शब्दों में)

वैदिश नगर में चारों वर्णों के लोग सुख से रहते थे, सब विष्णु भक्त थे, और हर कोई एकादशी का व्रत करता था। जब फाल्गुन शुक्ल पक्ष की आमलकी एकादशी आई, तो राजा और सारी प्रजा ने व्रत किया, मंदिर में आंवले के वृक्ष की पूजा की और रात भर जागरण किया।

उस रात एक बहेलिया मंदिर में आया, जो पशुओं को मारकर परिवार पालने वाला पापी व्यक्ति था। भूखा-प्यासा वह एक कोने में बैठकर जागरण देखने लगा और विष्णु भगवान की कथा तथा एकादशी की महिमा सुनने लगा। इस प्रकार सबकी तरह वह भी रात भर जागता रहा। सुबह वह घर गया और भोजन किया।

कुछ समय बाद बहेलिये की मृत्यु हो गई। उस आमलकी एकादशी के जागरण के पुण्य से उसने राजा विदूरथ के घर पुत्र के रूप में जन्म लिया, नाम वसुरथ रखा गया, और वह बड़ा होकर राजा बना।

एक दिन राजा वसुरथ शिकार पर गए, रास्ता भटक गए, और वन में एक पेड़ के नीचे सो गए। म्लेच्छों का एक दल, जिन्हें उन्होंने देश से निकाला था, उन्हें अकेला पाकर हथियारों से उन पर टूट पड़ा। पर हथियार उन पर फूलों की तरह गिरे, और थोड़ी ही देर में सब हमलावर मरे पड़े थे।

जागने पर राजा सोचने लगे कि उन्हें किसने बचाया। आकाशवाणी हुई कि यह विष्णु भगवान की कृपा है। राजा अपने राज्य लौटे और धर्मपूर्वक राज्य करने लगे।

कथा कहती है कि जो आमलकी एकादशी का व्रत करते हैं, वे हर कार्य में सफल होते हैं और अंत में विष्णुलोक जाते हैं।

यह कथा यहाँ केवल हमारे शब्दों में दी गई है: प्रकाशित रूप इसे अलग-अलग शब्दों और विवरणों के साथ कहते हैं, और इसका कोई मूल पाठ हमने नहीं मिलाया है। इसकी हर बात नीचे दिए गए कम से कम दो प्रकाशित रूपों में मिलती है।

इस पाठ के बारे में

आमलकी एकादशी फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी है। इसकी कथा उस शृंखला का भाग है जिसमें हर एकादशी की महिमा बताई जाती है, प्रायः श्रीकृष्ण के पांडवों को दिए उत्तर के रूप में। इस दिन विष्णु भगवान के साथ उन्हें प्रिय आंवले के वृक्ष की पूजा होती है। इसे रंगभरी एकादशी भी कहते हैं।

प्रकाशित रूप हिंदी गद्य में हैं और उनके शब्दों तथा कुछ नामों और विवरणों में अंतर है। ऊपर दी गई कथा में केवल वही बातें हैं जिन पर नीचे दिए गए कम से कम दो रूप सहमत हैं। इस वर्ष की तिथि के लिए एकादशी देखें।

पाठ कैसे किया जाता है

कथा आमलकी एकादशी के दिन विष्णु भगवान की पूजा के अंग के रूप में पढ़ी या सुनी जाती है। परंपराएँ परिवार और क्षेत्र के अनुसार अलग होती हैं।

और पढ़ें: विष्णु

और व्रत कथाएँ

स्रोत और जाँच

तुलना किए गए संस्करण
    कथा के स्रोत
    पाठ की जाँच
    सनातनशाला संपादकीय प्रक्रिया
    अंतिम जाँच

    परिवर्तन सूची

    • : प्रकाशित। इस पृष्ठ पर दिए गए प्रकाशित रूपों से हमारे शब्दों में लिखी कथा (संपादकीय नीति देखें)।

    त्रुटि बताएं

    इस पृष्ठ में कोई गलती मिली? बताएं क्या और कहाँ।