जया एकादशी व्रत कथा · Jaya Ekadashi Vrat Katha
गंधर्व माल्यवान और पुष्पवती की कथा, जिन्हें इंद्र ने पिशाच बनने का शाप दिया और जो अनजाने में जया एकादशी का व्रत करके मुक्त हुए, प्रकाशित रूपों से हमारे शब्दों में।
कथा (हमारे शब्दों में)
श्रीकृष्ण ने कहा कि माघ शुक्ल पक्ष की एकादशी को जया कहते हैं; यह बड़े से बड़े पापों का नाश करती है और भूत-पिशाच योनि से मुक्त करती है। उन्होंने इसकी कथा सुनाई।
देवराज इंद्र स्वर्ग के नंदन वन में अप्सराओं के साथ आनंद कर रहे थे, और गंधर्व उनके लिए गा और नाच रहे थे। उनमें गंधर्व माल्यवान और गंधर्व कन्या पुष्पवती भी थे। दोनों में प्रेम हो गया, और एक-दूसरे में मन लगे रहने के कारण वे ठीक से गा न सके: ताल टूटने लगा और गीत रुकने लगा। इंद्र ने इसे अपना अपमान माना और शाप दिया: "तुमने मेरी आज्ञा का उल्लंघन किया है; मृत्युलोक में जाकर पति-पत्नी के रूप में पिशाच बनो।"
दुखी होकर वे हिमालय पर चले गए और पिशाच बनकर कष्ट भोगते भटकने लगे, ठंड से पीड़ित और नींद से वंचित। एक दिन पिशाच ने पत्नी से कहा कि अवश्य उन्होंने बड़े पाप किए होंगे जो यह दशा मिली, और अब उन्हें कोई पाप नहीं करना चाहिए।
संयोग से माघ की जया एकादशी आई। उस दिन दुख के कारण उन्होंने भोजन नहीं किया और किसी जीव की हिंसा नहीं की। सूर्यास्त के समय वे एक पीपल के पेड़ के नीचे बैठ गए, और कड़ाके की ठंड वाली उस रात उन्हें नींद नहीं आई।
इस प्रकार अनजाने में उन्होंने जया एकादशी का व्रत और रात्रि-जागरण कर लिया। सुबह होते ही उसके प्रभाव और विष्णु भगवान की कृपा से वे पिशाच-रूप से मुक्त होकर तेजस्वी गंधर्व और अप्सरा के रूप में स्वर्ग लौटे। जब उन्होंने इंद्र को प्रणाम किया, तो इंद्र आश्चर्य से पूछने लगे कि वे कैसे मुक्त हुए, और माल्यवान ने बताया कि यह विष्णु भगवान की कृपा और जया एकादशी के व्रत का प्रभाव है।
यह कथा यहाँ केवल हमारे शब्दों में दी गई है: प्रकाशित रूप इसे अलग-अलग शब्दों और विवरणों के साथ कहते हैं, और इसका कोई मूल पाठ हमने नहीं मिलाया है। इसकी हर बात नीचे दिए गए कम से कम दो प्रकाशित रूपों में मिलती है।
इस पाठ के बारे में
जया एकादशी माघ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी है। इसकी कथा उस शृंखला का भाग है जिसमें हर एकादशी की महिमा बताई जाती है, प्रायः श्रीकृष्ण के पांडवों को दिए उत्तर के रूप में।
प्रकाशित रूप हिंदी गद्य में हैं और उनके शब्दों तथा कुछ नामों और विवरणों में अंतर है। ऊपर दी गई कथा में केवल वही बातें हैं जिन पर नीचे दिए गए कम से कम दो रूप सहमत हैं। इस वर्ष की तिथि के लिए जया एकादशी देखें।
पाठ कैसे किया जाता है
कथा जया एकादशी के दिन विष्णु भगवान की पूजा के अंग के रूप में पढ़ी या सुनी जाती है। परंपराएँ परिवार और क्षेत्र के अनुसार अलग होती हैं।
कब पढ़ा जाता है
- जया एकादशी · बुधवार, 17 फ़रवरी 2027
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और व्रत कथाएँ
स्रोत और जाँच
- तुलना किए गए संस्करण
- कथा के स्रोत
- जया एकादशी व्रत कथा, Bhakti Bharat
- जया एकादशी व्रत कथा, Shubh Panchang
- पाठ की जाँच
- सनातनशाला संपादकीय प्रक्रिया
- अंतिम जाँच
परिवर्तन सूची
- : प्रकाशित। इस पृष्ठ पर दिए गए प्रकाशित रूपों से हमारे शब्दों में लिखी कथा (संपादकीय नीति देखें)।