कामिका एकादशी व्रत कथा · Kamika Ekadashi Vrat Katha
कामिका एकादशी की महिमा, जैसी भीष्म पितामह ने नारद जी को बताई: विष्णु पूजन, तुलसी-दल का अर्पण, और रात भर जलते दीपक, प्रकाशित रूपों से हमारे शब्दों में।
कथा (हमारे शब्दों में)
श्रीकृष्ण ने पांडवों को वह बताया जो भीष्म पितामह ने नारद जी से कहा था, जब उन्होंने श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी के बारे में पूछा।
भीष्म जी ने कहा कि इस एकादशी को कामिका कहते हैं, और इसकी कथा सुनने मात्र से वाजपेय यज्ञ का फल मिलता है। इस दिन शंख, चक्र और गदाधारी विष्णु भगवान की पूजा होती है। जो धूप, दीप और नैवेद्य से उनकी पूजा करता है, उसे गंगा-स्नान से भी बड़ा फल मिलता है, और ग्रहण के समय केदार और कुरुक्षेत्र में या व्यतीपात योग में गंडकी नदी में स्नान के बराबर पुण्य मिलता है। जो इस प्रकार पूजा न कर सके, उसे कम से कम कामिका एकादशी का व्रत करना चाहिए। इस दिन विष्णु-पूजन से सब देवताओं, नागों, किन्नरों और पितरों की भी पूजा हो जाती है, इसलिए पाप से डरने वालों को यह व्रत करना चाहिए।
भीष्म जी ने कहा कि स्वयं भगवान ने कहा है कि यह व्रत अध्यात्म-विद्या से भी अधिक फल देता है। जो इस दिन तुलसी-दल से उनकी पूजा करता है, वह संसार में रहकर भी उससे वैसे अलग रहता है जैसे कमल जल में रहकर भी जल से अलग रहता है; विष्णु भगवान रत्नों और मोतियों से अधिक तुलसी-दल से प्रसन्न होते हैं। तुलसी के दर्शन मात्र से पाप नष्ट होते हैं, उसके स्पर्श से मनुष्य पवित्र होता है, और भगवान के चरणों में तुलसी अर्पित करने से मुक्ति मिलती है।
जो कामिका एकादशी की रात जागरण करता है और दीपदान करता है, उसके पुण्य को कर्मों का लेखा रखने वाले चित्रगुप्त भी नहीं लिख सकते। जो इस दिन भगवान के सामने घी या तेल का दीपक जलाता है, उसे सूर्यलोक में हज़ारों दीपकों का प्रकाश मिलता है।
यह कथा यहाँ केवल हमारे शब्दों में दी गई है: प्रकाशित रूप इसे अलग-अलग शब्दों और विवरणों के साथ कहते हैं, और इसका कोई मूल पाठ हमने नहीं मिलाया है। इसकी हर बात नीचे दिए गए कम से कम दो प्रकाशित रूपों में मिलती है।
इस पाठ के बारे में
कामिका एकादशी श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी है (पूर्णिमांत पंचांग के अनुसार; अमांत पंचांग में यह आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष में आती है)। इसकी कथा उस शृंखला का भाग है जिसमें हर एकादशी की महिमा बताई जाती है, प्रायः श्रीकृष्ण के पांडवों को दिए उत्तर के रूप में।
प्रकाशित रूप हिंदी गद्य में हैं और उनके शब्दों तथा कुछ नामों और विवरणों में अंतर है। ऊपर दी गई कथा में केवल वही बातें हैं जिन पर नीचे दिए गए कम से कम दो रूप सहमत हैं। इस वर्ष की तिथि के लिए एकादशी देखें।
पाठ कैसे किया जाता है
कथा कामिका एकादशी के दिन विष्णु भगवान की पूजा के अंग के रूप में पढ़ी या सुनी जाती है। परंपराएँ परिवार और क्षेत्र के अनुसार अलग होती हैं।
और पढ़ें: विष्णु
और व्रत कथाएँ
स्रोत और जाँच
- तुलना किए गए संस्करण
- कथा के स्रोत
- कामिका एकादशी व्रत कथा, Bhakti Bharat
- कामिका एकादशी व्रत कथा, Shubh Panchang
- पाठ की जाँच
- सनातनशाला संपादकीय प्रक्रिया
- अंतिम जाँच
परिवर्तन सूची
- : प्रकाशित। इस पृष्ठ पर दिए गए प्रकाशित रूपों से हमारे शब्दों में लिखी कथा (संपादकीय नीति देखें)।