कामदा एकादशी व्रत कथा · Kamada Ekadashi Vrat Katha
गंधर्व ललित की कथा, जो शाप से राक्षस बन गया, और उसकी पत्नी ललिता की, जिसने कामदा एकादशी के पुण्य से उसे मुक्त कराया, प्रकाशित रूपों से हमारे शब्दों में।
कथा (हमारे शब्दों में)
श्रीकृष्ण ने यह कथा वैसे सुनाई जैसे ऋषि वशिष्ठ ने राजा दिलीप को सुनाई थी, जब उन्होंने पूछा था कि चैत्र के शुक्ल पक्ष में कौन-सी एकादशी आती है।
राजा पुंडरीक के नगर में गंधर्व, किन्नर और अप्सराएँ रहते थे। उनमें गंधर्व ललित और उसकी पत्नी ललिता भी थे, जिनमें इतना प्रेम था कि वे एक-दूसरे से अलग नहीं रह पाते थे।
एक दिन ललित, ललिता के बिना, पुंडरीक की सभा में गा रहा था। गाते-गाते उसे ललिता की याद आई, और उसका गायन बिगड़ गया। नाग कर्कोटक ने उसके मन की बात जानकर राजा को बता दी। क्रोधित होकर कि ललित उसके सामने गाते हुए पत्नी को याद कर रहा था, पुंडरीक ने उसे नरभक्षी राक्षस बनने का शाप दिया, और ललित उसी क्षण विशाल और भयानक रूप वाला हो गया।
दुखी ललिता वन-वन भटकते अपने पति के पीछे चलती रही। अंत में वह एक ऋषि के आश्रम पहुँची और पूछा कि उसके पति का उद्धार कैसे हो। ऋषि ने बताया कि चैत्र शुक्ल पक्ष की कामदा एकादशी आने वाली है, और यदि वह उसका व्रत करके उसका पुण्य पति को दे दे, तो वह शाप से मुक्त हो जाएगा।
ललिता ने व्रत किया, और अगले दिन (द्वादशी को) ब्राह्मणों के सामने उसका पुण्य पति को अर्पित किया। उसी क्षण ललित राक्षस-रूप से मुक्त होकर फिर गंधर्व बन गया, और दोनों विमान में बैठकर स्वर्ग चले गए।
कथा के अंत में कहा गया है कि यह व्रत पापों का नाश करता है और राक्षस-योनि से भी छुड़ा देता है, और इसकी कथा पढ़ने या सुनने से वाजपेय यज्ञ का फल मिलता है।
यह कथा यहाँ केवल हमारे शब्दों में दी गई है: प्रकाशित रूप इसे अलग-अलग शब्दों और विवरणों के साथ कहते हैं, और इसका कोई मूल पाठ हमने नहीं मिलाया है। इसकी हर बात नीचे दिए गए कम से कम दो प्रकाशित रूपों में मिलती है।
इस पाठ के बारे में
कामदा एकादशी चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी है। इसकी कथा उस शृंखला का भाग है जिसमें हर एकादशी की महिमा बताई जाती है, प्रायः श्रीकृष्ण के पांडवों को दिए उत्तर के रूप में।
प्रकाशित रूप हिंदी गद्य में हैं और उनके शब्दों तथा कुछ नामों और विवरणों में अंतर है। ऊपर दी गई कथा में केवल वही बातें हैं जिन पर नीचे दिए गए कम से कम दो रूप सहमत हैं। इस वर्ष की तिथि के लिए कामदा एकादशी देखें।
पाठ कैसे किया जाता है
कथा कामदा एकादशी के दिन विष्णु भगवान की पूजा के अंग के रूप में पढ़ी या सुनी जाती है। परंपराएँ परिवार और क्षेत्र के अनुसार अलग होती हैं।
कब पढ़ा जाता है
- कामदा एकादशी · शनिवार, 17 अप्रैल 2027
और पढ़ें: विष्णु
और व्रत कथाएँ
स्रोत और जाँच
- तुलना किए गए संस्करण
- कथा के स्रोत
- कामदा एकादशी व्रत कथा, Bhakti Bharat
- कामदा एकादशी व्रत कथा, Shubh Panchang
- पाठ की जाँच
- सनातनशाला संपादकीय प्रक्रिया
- अंतिम जाँच
परिवर्तन सूची
- : प्रकाशित। इस पृष्ठ पर दिए गए प्रकाशित रूपों से हमारे शब्दों में लिखी कथा (संपादकीय नीति देखें)।