पापमोचनी एकादशी व्रत कथा · Papmochani Ekadashi Vrat Katha
ऋषि मेधावी और अप्सरा मंजुघोषा की कथा, जो पापमोचनी एकादशी के व्रत से मुक्त हुए, प्रकाशित रूपों से हमारे शब्दों में।
कथा (हमारे शब्दों में)
एक बार राजा मान्धाता ने ऋषि लोमश से पूछा कि मनुष्य अपने पापों से कैसे मुक्त हो सकता है, और ऋषि ने उन्हें यह कथा सुनाई।
चैत्ररथ वन में, जहाँ अप्सराएँ और गंधर्व विहार करते थे, युवा ऋषि मेधावी तपस्या करते थे। अप्सरा मंजुघोषा उन्हें मोहित करने आई। आश्रम से कुछ दूरी पर बैठकर वह वीणा बजाकर मधुर स्वर में गाने लगी। उसके गीत और सौंदर्य से आकृष्ट होकर ऋषि तपस्या छोड़कर उसके साथ रहने लगे, और उन्हें समय का कोई भान न रहा।
जब भी अप्सरा स्वर्ग लौटने की आज्ञा माँगती, ऋषि कहते कि सुबह तक रुको। अंत में उसने ऋषि से सोचने को कहा कि उसे आए कितना समय हो गया, तब ऋषि को पता चला कि सत्तावन वर्ष बीत चुके हैं। तपस्या नष्ट होने से क्रोधित होकर उन्होंने उसे पिशाचिनी बनने का शाप दे दिया।
उसने लंबे साथ की याद दिलाते हुए मुक्ति की प्रार्थना की। तब ऋषि ने उसे बताया कि पापमोचनी एकादशी, यानी पापों से छुड़ाने वाली एकादशी, का व्रत करने से वह मुक्त हो जाएगी।
फिर मेधावी अपने पिता ऋषि च्यवन के पास गए और अपना दोष बताया। च्यवन ऋषि ने उन्हें भी अपने पाप के प्रायश्चित के लिए पापमोचनी एकादशी का व्रत करने को कहा। दोनों ने व्रत किया: मेधावी के पाप नष्ट हो गए, और मंजुघोषा पिशाच-योनि से छूटकर अपने सुंदर रूप में स्वर्ग लौट गई।
ऋषि लोमश ने अंत में कहा कि जो यह व्रत करता है, वह सब पापों से मुक्त हो जाता है।
यह कथा यहाँ केवल हमारे शब्दों में दी गई है: प्रकाशित रूप इसे अलग-अलग शब्दों और विवरणों के साथ कहते हैं, और इसका कोई मूल पाठ हमने नहीं मिलाया है। इसकी हर बात नीचे दिए गए कम से कम दो प्रकाशित रूपों में मिलती है।
इस पाठ के बारे में
पापमोचनी एकादशी चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी है (पूर्णिमांत पंचांग के अनुसार; अमांत पंचांग में यह फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष में आती है)। इसकी कथा उस शृंखला का भाग है जिसमें हर एकादशी की महिमा बताई जाती है, प्रायः श्रीकृष्ण के पांडवों को दिए उत्तर के रूप में।
प्रकाशित रूप हिंदी गद्य में हैं और उनके शब्दों तथा कुछ नामों और विवरणों में अंतर है। ऊपर दी गई कथा में केवल वही बातें हैं जिन पर नीचे दिए गए कम से कम दो रूप सहमत हैं। इस वर्ष की तिथि के लिए पापमोचनी एकादशी देखें।
पाठ कैसे किया जाता है
कथा पापमोचनी एकादशी के दिन विष्णु भगवान की पूजा के अंग के रूप में पढ़ी या सुनी जाती है। परंपराएँ परिवार और क्षेत्र के अनुसार अलग होती हैं।
कब पढ़ा जाता है
- पापमोचनी एकादशी · शुक्रवार, 2 अप्रैल 2027
और पढ़ें: विष्णु
और व्रत कथाएँ
स्रोत और जाँच
- तुलना किए गए संस्करण
- कथा के स्रोत
- पापमोचनी एकादशी व्रत कथा, Bhakti Bharat
- पापमोचनी एकादशी व्रत कथा, Shubh Panchang
- पाठ की जाँच
- सनातनशाला संपादकीय प्रक्रिया
- अंतिम जाँच
परिवर्तन सूची
- : प्रकाशित। इस पृष्ठ पर दिए गए प्रकाशित रूपों से हमारे शब्दों में लिखी कथा (संपादकीय नीति देखें)।