मोहिनी एकादशी व्रत कथा · Mohini Ekadashi Vrat Katha
एक वैश्य के बिगड़े पुत्र धृष्टबुद्धि की कथा, जो मोहिनी एकादशी के व्रत से पापों से छूटा, जैसी ऋषि वशिष्ठ ने श्रीराम को सुनाई, प्रकाशित रूपों से हमारे शब्दों में।
कथा (हमारे शब्दों में)
एक बार श्रीराम ने ऋषि वशिष्ठ से ऐसा व्रत पूछा जिससे सब पाप और दुख नष्ट हो जाएँ। वशिष्ठ जी ने उन्हें वैशाख शुक्ल पक्ष की मोहिनी एकादशी के बारे में बताया और यह कथा सुनाई।
सरस्वती नदी के तट पर भद्रावती नगरी में, जहाँ चंद्रवंशी राजा राज्य करते थे, एक धनी और पुण्यात्मा वैश्य रहता था, जो विष्णु भक्त था और लोगों के लिए कुएँ, सरोवर और धर्मशालाएँ बनवाता था। उसके पाँच पुत्र थे। पाँचवाँ, धृष्टबुद्धि, बहुत पापी था: वह जुआ खेलता, वेश्याओं की संगति करता, न देवताओं को मानता न बड़ों को, और पिता का धन उड़ाता था। अंत में पिता ने उसे घर से निकाल दिया।
साथियों के छोड़ देने पर धृष्टबुद्धि दुखी होकर भटकने लगा। एक दिन, वैशाख मास में, वह ऋषि कौंडिन्य के आश्रम पहुँचा, जब ऋषि गंगा-स्नान करके लौट रहे थे। अपने दुख से व्याकुल होकर वह हाथ जोड़कर उनके सामने खड़ा हुआ और ऐसा व्रत पूछा जिससे वह पापों से छूट जाए।
कौंडिन्य ऋषि ने उसे वैशाख शुक्ल पक्ष की मोहिनी एकादशी का व्रत करने को कहा, जो अनेक जन्मों के मेरु पर्वत जैसे बड़े पापों को भी नष्ट कर देती है। धृष्टबुद्धि ने ऋषि की बताई विधि से व्रत किया। उसके प्रभाव से उसके पाप नष्ट हो गए, और वह गरुड़ पर बैठकर विष्णुलोक गया।
वशिष्ठ जी ने अंत में कहा कि मोह और पापों को दूर करने के लिए संसार में इससे श्रेष्ठ कोई व्रत नहीं है।
यह कथा यहाँ केवल हमारे शब्दों में दी गई है: प्रकाशित रूप इसे अलग-अलग शब्दों और विवरणों के साथ कहते हैं, और इसका कोई मूल पाठ हमने नहीं मिलाया है। इसकी हर बात नीचे दिए गए कम से कम दो प्रकाशित रूपों में मिलती है।
इस पाठ के बारे में
मोहिनी एकादशी वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी है। इसकी कथा उस शृंखला का भाग है जिसमें हर एकादशी की महिमा बताई जाती है, प्रायः श्रीकृष्ण के पांडवों को दिए उत्तर के रूप में।
प्रकाशित रूप हिंदी गद्य में हैं और उनके शब्दों तथा कुछ नामों और विवरणों में अंतर है। ऊपर दी गई कथा में केवल वही बातें हैं जिन पर नीचे दिए गए कम से कम दो रूप सहमत हैं। इस वर्ष की तिथि के लिए मोहिनी एकादशी देखें।
पाठ कैसे किया जाता है
कथा मोहिनी एकादशी के दिन विष्णु भगवान की पूजा के अंग के रूप में पढ़ी या सुनी जाती है। परंपराएँ परिवार और क्षेत्र के अनुसार अलग होती हैं।
कब पढ़ा जाता है
- मोहिनी एकादशी · रविवार, 16 मई 2027
और पढ़ें: विष्णु
और व्रत कथाएँ
स्रोत और जाँच
- तुलना किए गए संस्करण
- कथा के स्रोत
- मोहिनी एकादशी व्रत कथा, Bhakti Bharat
- मोहिनी एकादशी व्रत कथा, Shubh Panchang
- पाठ की जाँच
- सनातनशाला संपादकीय प्रक्रिया
- अंतिम जाँच
परिवर्तन सूची
- : प्रकाशित। इस पृष्ठ पर दिए गए प्रकाशित रूपों से हमारे शब्दों में लिखी कथा (संपादकीय नीति देखें)।