दुर्गा मंत्र · Durga Mantras

दुर्गा सप्तशती परंपरा के, दुर्गा जी के तीन सबसे अधिक पढ़े जाने वाले श्लोक।

  1. सर्व मङ्गल माङ्गल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके । शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणि नमोऽस्तुते ॥

    sarva maṅgala māṅgalye śive sarvārtha sādhike । śaraṇye tryaṃbake gaurī nārāyaṇi namo'stute ॥

    हे सब मंगलों की मंगलमयी, हे शिवा (कल्याणकारी), सब प्रयोजनों को सिद्ध करने वाली, शरण देने वाली, त्रिनेत्रा गौरी: हे नारायणी, आपको नमस्कार है।

    O auspiciousness of all that is auspicious, O Shiva (the auspicious one), who accomplishes every purpose, giver of refuge, three-eyed Gauri: O Narayani, salutation to you.

  2. या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥

    yā devī sarvabhūteṣu śaktirūpeṇa saṃsthitā । namastasyai namastasyai namastasyai namo namaḥ ॥

    जो देवी सब प्राणियों में शक्ति-रूप से स्थित हैं, उन्हें नमस्कार, उन्हें नमस्कार, उन्हें नमस्कार, बार-बार नमस्कार।

    To the Goddess who dwells in all beings in the form of power: salutation to her, salutation to her, salutation to her, salutation again and again.

  3. जयन्ती मङ्गला काली भद्रकाली कपालिनी । दुर्गा शिवा क्षमा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तु ते ॥

    jayantī maṅgalā kālī bhadrakālī kapālinī । durgā śivā kṣamā dhātrī svāhā svadhā namo'stu te ॥

    जयंती, मंगला, काली, भद्रकाली, कपालिनी, दुर्गा, शिवा, क्षमा, धात्री, स्वाहा और स्वधा: आपको नमस्कार है।

    Jayanti (the victorious), Mangala (the auspicious), Kali, Bhadrakali, Kapalini, Durga, Shiva, Kshama (the forgiving), Dhatri (the sustainer), Svaha and Svadha: salutation to you.

इस पाठ के बारे में

इस पृष्ठ पर देवी के तीन संस्कृत श्लोक हैं, जिनका मंत्र के रूप में अलग से भी पाठ होता है। "सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये" नारायणी स्तुति (देवी माहात्म्य, अध्याय 11) से है और उन्हें गौरी और नारायणी, सब मंगलों का मंगल कहकर नमस्कार करता है। "या देवी सर्वभूतेषु" अध्याय 5 की स्तुति का सबसे प्रसिद्ध श्लोक है, जिसमें देवता सब प्राणियों में शक्ति-रूप से स्थित देवी को नमन करते हैं; यही ढाँचा अनेक अन्य रूपों (चेतना, बुद्धि, माता आदि) के लिए दोहराया जाता है। "जयन्ती मङ्गला काली" सप्तशती से पहले पढ़े जाने वाले अर्गला स्तोत्र का पहला श्लोक है, और दुर्गा पूजा की पुष्पांजलि का भी पहला मंत्र है। हर श्लोक को अलग-अलग स्वतंत्र संस्करणों से मिलाया गया है।

पाठ कैसे किया जाता है

इन श्लोकों का पाठ दैनिक देवी-पूजा में, पूरे नवरात्रि में और दुर्गा पूजा की पुष्पांजलि में किया जाता है, और प्रायः 108 बार जप किया जाता है। परंपराएँ भिन्न होती हैं।

और पढ़ें: दुर्गा

और मंत्र

स्रोत और जाँच

तुलना किए गए संस्करण
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पाठ की जाँच
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