षटतिला एकादशी व्रत कथा · Shattila Ekadashi Vrat Katha
तिल के छह उपयोगों की शिक्षा, और एक भक्त स्त्री की कथा, जो व्रत तो करती थी पर दान नहीं देती थी, और जिसने स्वयं विष्णु भगवान से दान का मूल्य सीखा, प्रकाशित रूपों से हमारे शब्दों में।
कथा (हमारे शब्दों में)
एक बार ऋषि दाल्भ्य ने ऋषि पुलस्त्य से पूछा कि ब्रह्महत्या, चोरी या व्यभिचार जैसे बड़े पाप करने वाले भी कैसे बच सकते हैं। पुलस्त्य जी ने कहा कि माघ मास की षटतिला एकादशी का व्रत सब पापों से मुक्त करता है।
उन्होंने कहा कि इस व्रत में काम, क्रोध, लोभ और मोह का त्याग करना चाहिए। पहले से गोबर में तिल और कपास मिलाकर कंडे बनाए जाते हैं और उनसे 108 बार हवन किया जाता है। एकादशी को विष्णु भगवान की पूजा करके रात्रि-जागरण करना चाहिए। अपनी सामर्थ्य के अनुसार तिल से भरा पात्र और श्यामा गौ दान करनी चाहिए: जितने तिल दान किए जाएँ, उतने हज़ार वर्ष स्वर्ग में वास मिलता है। इस दिन तिल का छह प्रकार से उपयोग होता है, इसलिए इसे षटतिला कहते हैं।
फिर कथा सुनाई गई, जैसी विष्णु भगवान ने नारद जी को सुनाई थी। पृथ्वी पर एक ब्राह्मणी रहती थी, जो निष्ठा से व्रत और पूजा करती थी, पर कभी किसी को अन्न या धन दान नहीं करती थी। उसे सिखाने के लिए विष्णु भगवान भिक्षुक के वेश में उसके द्वार आए और भिक्षा माँगी। उसने देने के लिए मिट्टी के एक ढेले के सिवा कुछ न दिया, और वही उनके पात्र में डाल दिया।
समय आने पर उसने समझा कि दान के बिना व्रत खाली हाथ के समान है। उसने तिल-दान सहित विधिपूर्वक षटतिला एकादशी का व्रत किया, और उसके अभाव के बदले उसे समृद्धि मिली।
कथा सिखाती है कि यह व्रत करना चाहिए और लोभ छोड़कर तिल आदि का दान करना चाहिए, जिससे दुर्भाग्य और दरिद्रता दूर होती है।
यह कथा यहाँ केवल हमारे शब्दों में दी गई है: प्रकाशित रूप इसे अलग-अलग शब्दों और विवरणों के साथ कहते हैं, और इसका कोई मूल पाठ हमने नहीं मिलाया है। इसकी हर बात नीचे दिए गए कम से कम दो प्रकाशित रूपों में मिलती है।
इस पाठ के बारे में
षटतिला एकादशी माघ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी है (पूर्णिमांत पंचांग के अनुसार; अमांत पंचांग में यह पौष मास के कृष्ण पक्ष में आती है)। इसकी कथा उस शृंखला का भाग है जिसमें हर एकादशी की महिमा बताई जाती है, प्रायः श्रीकृष्ण के पांडवों को दिए उत्तर के रूप में। इसके नाम का अर्थ है "तिल के छह (उपयोग)": इस दिन तिल का छह प्रकार से उपयोग होता है, स्नान में, उबटन में, हवन में, जल में मिलाकर पीने में, भोजन में, और दान में।
प्रकाशित रूप हिंदी गद्य में हैं और उनके शब्दों तथा कुछ नामों और विवरणों में अंतर है। ऊपर दी गई कथा में केवल वही बातें हैं जिन पर नीचे दिए गए कम से कम दो रूप सहमत हैं। इस वर्ष की तिथि के लिए एकादशी देखें।
पाठ कैसे किया जाता है
कथा षटतिला एकादशी के दिन विष्णु भगवान की पूजा के अंग के रूप में पढ़ी या सुनी जाती है। परंपराएँ परिवार और क्षेत्र के अनुसार अलग होती हैं।
और पढ़ें: विष्णु
और व्रत कथाएँ
स्रोत और जाँच
- तुलना किए गए संस्करण
- कथा के स्रोत
- षटतिला एकादशी व्रत कथा, Bhakti Bharat
- षटतिला एकादशी व्रत कथा, Shubh Panchang
- षट्तिला एकादशी: तिल के छह उपयोग, PanchangBodh
- पाठ की जाँच
- सनातनवाणी संपादकीय प्रक्रिया
- अंतिम जाँच
परिवर्तन सूची
- : प्रकाशित। इस पृष्ठ पर दिए गए प्रकाशित रूपों से हमारे शब्दों में लिखी कथा (संपादकीय नीति देखें)।