धनतेरस 2018:जानिये क्यों मनाया जाता है धनतेरस कि क्या हैं कथा

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कार्तिक माह के तेरहवे दिन मनाये जाने वाले पर्व को ही धनतेरस के नाम से जाना जाता है धनतेरस अर्थात वह दिन जिस दिन धन की बढ़ोतरी होती है उसे धनतेरस के नाम से जाना जाता है यह पर्व हिन्दुओं के मुख्य पर्वों में से एक है इसका शाब्दिक अर्थ होता है धन + तेरस अर्थात धन का तेरह गुना की वृद्धि दिवाली में जैसे धन की देवी माता लक्ष्मी की पूजन होती है वैसे ही धन के देवता कुबेर का पूजन धनतेरस के दिन किया जाता है पौराणिक मान्यताओं के अनुसार कार्तिक माह के कृष्ण पस की त्रयोदशी को भगवान कुबेर का जन्म हुआ था इसी दिन समुन्द्र मंथन के दौरान भगवान कुबेर हाथ में अमृत कलश ले कर समुद्र से प्रगट हुए थे इसीलिए धन्वंतरि भगवान को औषधि विज्ञान का जनक भी कहा जाता है साथ ही ऐसी मान्यता भी है की धनतेरस के दिन धातृ का क्रय करना शुभकारी होता है इसलिए जनसमूह के द्वारा सोने चांदी के गहने विभिन्न धातुओं से निर्मित बर्तन आदि का क्रय करते है

धनतेरस का महत्व

धनतेरस पर्व पर घर में नई चीजों को लाना ख़ास कर धातु से निमित वास्तु का बहुत ही शुभ माना जाता है। लोग कैलेंडर के अनुसार शुभ मुहूर्त के दौरान लक्ष्मी पूजा करते हैं। कुछ स्थानों पर सात अनाज (गेहूं, चना, जौ, उड़द, मूंग, मसूर) की पूजा की जाती है। माता लक्ष्मी की पूजा के दौरान सुनहरा फूल और मिठाई अर्पित की जाती हैं।

यह त्यौहार सभी लोगों के जीवन में एक बड़ी भूमिका निभाता है। यह सभी के लिए एक बहुत खुशी, धन, समृद्धि, बुद्धि और अच्छा भाग्य लाता है। लोग अपने आस पास से बुरी ऊर्जा और आलस्य हटाने के लिये सभी वस्तुओं को साफ करते है। पूजा करने से पहले लोग अपने शरीर, मस्तिष्क और आत्मा को साफ करने के लिये नहाते है।

इस दिन भगवान धनवंतरि का जन्म दिवस है चिकित्सा विज्ञान से संबंधित सभी नए अनुसंधानों भी इसी दिन स्थापित किये जाते हैं

धनतेरस की कथा

एक बार जब विष्णु जी की पृथ्वी लोक में भ्रमण करने की इच्छा जाग्रत हुई और प्रभु पृथ्वी पर आने वाले के लिए तैयार हुए तभी माता लक्ष्मी ने भी उनके साथ चलने का आग्रह किया तो भगवान विष्णु ने माता लक्ष्मी से उनकी एक शर्त मानने को कहा इतना सुनते ही माता लक्ष्मी जी ने उनकी बात सहज ही स्वीकार कर ली

इसके बाद दोनों धरती पर आए तो कुछ देर बाद विष्णु जी ने उनसे बताया कि मैं दक्षिण दिशा की तरफ जा रहा हूँ | परन्तु तुम उस तरफ नहीं आओगी | यहाँ तक कि उस ओर देखने से भी मना कर दिया | कुछ समय पश्चात माता लक्ष्मी जी के मन में ख्याल आया की ऐसा कौन-सा रहस्य है जिसके कारण विष्णु जी ने उन्हें दक्षिण दिशा में आने से मना कर दिया इतना सोचने के बाद माता लक्ष्मी उसी ओर चल पड़ी जिस और विष्णु जी गए थे कुछ दूर जाने के बाद उन्हें एक खेत नज़र आया जो कि पीले रंग के सरसों से भरा हुआ था माता लक्ष्मी जी वहां रुकी और उन्होंने सरसों के कुछ फूलों को तोड़कर अपना श्रृंगार किया उसके बाद थोडा और आगे बढ़ने पर उन्हें गन्नों से भरा हुआ खेत दिखाई पड़ा वहां उन्होंने एक गन्ना तोड़कर चूस लिया तभी भगवान् विष्णु जी वहां आ गए और माता लक्ष्मी जी वहां देखकर क्रोधित हुए माता लक्ष्मी जी को भगवान् विष्णु जी ने उसी क्षण किसान के खेतों से गन्ने चुराने व सरसों के फूलों को तोड़ने के अपराध में बारह वर्ष तक उसी किसान के घर में रहने का श्राप दिया था बारह साल तक धनों की देवी उस किसान के घर में रही वह किसान बहुत गरीब था लेकिन माता लक्ष्मी की कृपा से भी वह धन-धान्य हो गया जब बारह वर्ष का श्राप पूरा हुआ तब विष्णु जी माता लक्ष्मी जी को लेने आए परन्तु किसान माता लक्ष्मी जी को अपने घर से नहीं जाने देना चाहता था इसलिए किसान ने उनसे वहीं रुक जाने का आग्रह किया इस पर विष्णु जी ने किसान को बताया की देवी लक्ष्मी चंचला है और यह कही नहीं रूकती लेकिन मेरे दिए गये श्राप के कारण इतने वर्षों से ये यहाँ पर रहीं किसान के बहुत आग्रह करने पर लक्ष्मी जी ने उन्हें बताया कि यदि वास्तव में तुम मुझे अपने घर में रखना चाहते हो तो कल त्रयोदशी है कल के दिन घर की अच्छे-से साफ़-सफाई करने के बाद शाम के समय एक कलश में एक रुपए रखकर माता लक्ष्मी जी की पूजा करना इतना कहकर माता लक्ष्मी सभी दिशाओं में रोशनी के रूप में बिखर गयीं अगले दिन किसान ने ठीक वैसे ही पूजा की जैसे उसे करने को कहा गया था इसके बाद किसान हमेशा धन-धान्य रहा तभी से लोग इस दिन अपने घरों में धनतेरस की पूजा करते हैं|

एक अन्य कथा -:

एक किवदन्ती के अनुसार एक राज्य में एक निसंतान राजा था कई वर्षों तक प्रतिक्षा करने के बाद उसके यहां पुत्र संतान कि प्राप्ति हुई राजा के पुत्र के बारे में किसी ज्योतिषी ने यह कहा कि बालक का विवाह जिस दिन भी होगा उसके चार दिन बाद ही इसकी मृ्त्यु हो जायेगी.

ज्योतिषी की यह बात सुनकर राजा को बेहद दु:ख दूसरी ओर ऎसी घटना से बचने के लिये उसने राजकुमार को ऎसी जगह पर भेज दिया जहां आस-पास कोई स्त्री न रहती हो एक दिन वहां से एक राजकुमारी गुजरी राजकुमार और राजकुमारी दोनों ने एक दूसरे को देखा दोनों एक दूसरे को देख कर मोहित हो गये और उन्होने आपस में विवाह कर लिया

ज्योतिषी की भविष्यवाणी के अनुसार ठीक चार दिन बाद यमदूत राजकुमार के प्राण लेने आ पहुंचें. यमदूत को देख कर राजकुमार की पत्नी विलाप करने लगी यह देख यमदूत ने यमराज से विनती की और कहा की इसके प्राण बचाने का कोई उपाय बताईयें इस पर यमराज ने कहा की जो प्राणी कार्तिक कृ्ष्ण पक्ष की त्रयोदशी की रात में जो प्राणी मेरा पूजन करके दीप माला से दक्षिण दिशा की ओर मुंह वाला दीपक जलायेगा उसे कभी अकाल …

तिथि मुहूर्त :

धनतेरस का प्रारम्भ दिनांक 5 नवंबर 2018 दिन सोमवार रात्रि 11 बजकर 17 मिनट से

धनतेरस की समाप्ति दिनांक 6 नवंबर 2018 दिन मंगलवार रात्रि 10 बजकर 06 मिनट तक

प्रदोष काल :

सूर्यास्त के बाद के 2 घंटे 24 मिनट के समय को प्रदोषकाल कहा जाता है। यम दीपदान और लक्ष्मी पूजन इसी मुहूर्त में करना चाहिए,

सांय काल में शुभ :

प्रदोष काल का समय शाम 5:31 से रात 8:04 बजे तक, स्थिर लग्न शाम 6:10 बजे से रात 8:09 बजे और धनतेरस पूजा के लिए समय शाम 6:10 बजे से रात 8:04 बजे तक है।

चौघाडिया मुहूर्त :

इस दौरान पूजा करने से लाभ होने की मान्यता है। इससे धन, स्वास्थ्य और आयु में बढ़ोतरी होती है।

अमृत काल मुहूर्त शाम 4:30 बजे से शाम 6:00 बजे तक

चर 5:56 बजे से शाम 7:30 बजे तक

धन तेरस की पूजा शुभ मुहूर्त में करनी चाहिए। सबसे पहले तेरह दीपक जला कर तिजोरी में कुबेर का पूजन करना चाहिए। देव कुबेर का ध्यान करते हुए उन्हें फूल चढाएं। इसके बाद धूप, दीप, नैवेद्य से पूजन करें। इस दिन स्थिर लक्ष्मी पूजन का विशेष महत्व है।

धनतेरस पर यम पूजा

धनतेरस के दिन यमदेव की पूजा की जाती है। माना जाता है की इस दिन यमदेव का पूजन करने से यमदेव हमें अकालमृत्यु का भय दूर करते हैं। इसलिए अकालमृत्यु से बचने के लिए धनतेरस को यमदेव की पूजा की जाती है।

अब आइये जानते है यम पूजा विधि के बारे में

यम का दीया कैसे जलाये – यम पूजन विधि

  • पूजा दिन में नहीं बल्कि रात में होती है। यमराज की पूजा सिर्फ एक चौमुखी दीप जलाकर की जाती है।
  • इसके लिए आटे का दीपक बनाकर घर के मुख्य द्वार के दाईं ओर रख दिया जाता है। इस दीया को जमदीवा, जम का दीया या यमराज का दीपक भी कहा जाता है।
  • रात को घर की स्त्रियां दीपक में तेल डालकर नई रूई की बत्ती बनाकर, चार बत्तियां जलाती हैं । दीपक की बत्ती दक्षिण दिशा की ओर रखनी चाहिए।
  • दीपक जलाने से पहले उसकी जल, रोली, फूल, चावल, गुड़, नैवेद्य आदि से पूजा करनी चाहिए। घर में पहले से दीपक जलाकर यम का दीया ना निकालें।
  • धनतेरस का दीपक मृत्यु के नियंत्रक देव यमराज के निमित्त जलाया जाता है, इसलिए दीप जलाते समय पूर्ण श्रद्धा से उन्हें नमन करने के साथ ही यह भी प्रार्थना करें कि वे आपके परिवार पर दया दृष्टि बनाए रखें और किसी की अकाल मृत्यु न हो।

राशियों के अनुसार क्या क्रय करना होगा शुभ :

मेष राशी वाले जातको को ताम्बा और स्वर्ण मिश्रित धातु या फिर ताम्बे का लोटा|

वृषभ राशी के जातको को हीरा / चाँदी और फैशनेबल वस्त्र खरीदना चाहिए|

मिथुन राशी के जातको को कांसा / चाँदी, हरे रंग की चुडिया और पन्ना रत्न खरीदना चाहिए|

कर्क राशी के जातको को चाँदी की पूजन सामग्री और पायल का क्रय करना चाहिए|

सिंह राशी के जातको को ताम्बा और सोने से मिश्रित सूर्य और ताम्बे का लोटा और स्वर्ण खरीदना चाहिए|

कन्या राशी के जातको को चाँदी और पन्ना जड़ित आभूषण और मोबाईल खरीदना चाहिए|

तुला राशी के जातको को हीरा / चाँदी खरीदना चाहिए|

वृश्चिक राशी के जातको को मिटटी का गमला / चाँदी और फैशनेबल वस्त्र खरीदना चाहिए|

धनु राशी के जातको को पीतल / सोना और चने की दाल कलश में भर कर लाये तो विशेष लाभ होगा|

मकर राशी के जातको कोई भी लोहे का बर्तन खरीद सकते है / उनकी राशी का स्वामी शनि है तो लोहे की कोई वस्तु खरीदना चाहिए                               |

कुम्भ राशी के जातको को कोई भी लोहे का बर्तन खरीदना चाहिए और चने की दाल कलश में भर कर लाये तो विशेष लाभ होगा|

मीन राशी को सोने की धातु खरीदना चाहिए|

धनतेरस में राशिनुसार किये जाने वाले उपाय

मेष – यदि आप धनतेरस के दिन शाम के समय घर के मुख्य द्वार पर तेल का दीपक में दो काली गुंजा डाल दें तो साल भर आर्थिक अनुकूलता बनी रहेगी। आपका उधार दिया हुआ धन भी प्राप्त हो जाएगा।

वृषभ – यदि आपके संचित धन का लगातार खर्च हो रहा है तो धनतेरस के दिन पीपल के पांच पत्ते लेकर उन्हे पीले चंदन में रंगकर बहते हुए जल में छोड़ दें।

मिथुन – बरगद से पांच फल लाकर उसे लाल चंदन में रंगकर नए लाल वस्त्र में कुछ सिक्कों के साथ बांधकर अपने घर अथवा दुकान में किसी कील से लटका दें।

कर्क – यदि आपको अचानक धन लाभ की आशा हो तो धनतेरस के दिन शाम के समय पीपल वृक्ष के समीप तेल का पंचमुखी दीपक जलाएं।

सिंह – यदि व्यवसाय में बार-बार हानि हो रही हो या घर में बरकत ना रहती हो तो धनतेरस के दिन से गाय को रोज चारा डालने का नियम लें।

कन्या – यदि जीवन में आर्थिक स्थिरता नहीं हो तो धनतेरस के दिन दो कमलगट्टे लेकर उन्हें माता लक्ष्मी के मंदिर में अर्पित करें।

तुला – यदि आप आर्थिक परेशानी से जुझ रहे हैं तो धनतेरस के दिन शाम को लक्ष्मीजी के मंदिर में नारियल चढ़ाएं।

वृश्चिक – यदि आप निरंतर कर्ज में उलझ रहें हो तो धनतेरस के दिन श्मशान के कुएं का जल लाकर किसी पीपल वृक्ष पर चढ़ाएं।

धनु – धनतेरस के दिन गुलर के ग्यारह पत्तों को मोली से बांधकर यदि किसी वट वृक्ष पर बांध दिया जाए, तो आपकी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होगी।

मकर – यदि आप आर्थिक समस्या से परेशान है, किंतु रूकावटें आ रही हों, तो आक की रूई का दीपक शाम के समय किसी तिहारे पर रखने से आपको धन लाभ होगा।

कुंभ – जीवन स्थायी सुख-समृद्धि हेतु प्रत्येक धनतेरस की रात में पूजन करने वाले स्थान पर ही रात्रि में जागरण करना चाहिए।

मीन – यदि व्यवसाय में शिथिलता हो तो केले के दो पौधे रखकर उनकी देखभाल करें तथा उनके फलों को नहीं खाएं