देवउठनी एकादशी 2018: आज है तुलसी विवाह, व्रत करने से मिलता है भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी का आशीर्वाद, तुलसी विवाह के दौरान ध्यान रखें ये बातें

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आज है देवउठनी ऐकादशी, भगवान विष्णु के निंद्रा से जागने का दिन। इस दिन भगवान विष्णु की आराधना का बहुत महत्व है। इस एकादशी पर व्रत करने से बैकुंठ की प्राप्ति होती है। मान्यता है कि आज के दिन भगवान विष्णु निंद्रा से जाग जाते हैं और मांगलिक कार्यों की शुरूआत होती है। सभी देवों ने भगवान विष्णु को चार मास की योग निद्रा से जगाने के लिए घंटा, शंख, मृदंग आदि की मांगलिक ध्वनि के साथ श्लोकों का उच्चारण किया था।

इस एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा से जन्म जन्मांतर के पाप समाप्त हो जाते हैं। व्रत करने से भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त होता है और घर में समृद्धि आती है। भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी के साथ इस दिन तुलसी जी का शालिग्राम से विवाह भी कराया जाता है

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देवउठनी एकादशी के दिन तुलसी विवाह किया जाता है। इस दिन तुलसी जी का विवाह शालिग्राम से किया जाता है। अगर किसी व्यक्ति को कन्या नहीं है और वह जीवन में कन्या दान का सुख प्राप्त करना चाहता है तो वह तुलसी विवाह कर प्राप्त कर सकता है।

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तुलसी पूजा से घर में संपन्नता आती है तथा संतान योग्य बनती है। इस दिन आंवला, सिंघाड़े का भोग लगाया जाता है।  विवाह के समय तुलसी के पौधे को आंगन, छत या पूजास्थल के बीचोंबीच रखें। तुलसी का मंडप सजाने के लिए गन्ने का प्रयोग करें। विवाह के रिवाज शुरू करने से पहले तुलसी के पौधे पर चुनरी जरूर चढ़ाएं। गमले में शालिग्राम रखकर चावल की जगह तिल चढ़ाएं। तुलसी और शालिग्राम पर दूध में भीगी हल्दी लगाएं। अगर विवाह के समय बोला जाने वाला मंगलाष्टक आपको आता है तो वह अवश्य बोलें

तुलसी विवाह का शुभ मुहूर्त
तुलसी विवाह देवोत्थान एकादशी के दिन किया जाता है, लेकिन कई जगहों पर इस विवाह को द्वादशी तिथि को भी करते हैं.
एकादशी तिथि आरंभ: 19 नवंबर 2018 को दोपहर 2:29 बजे से
द्वादशी तिथि समाप्त: 20 नवंबर 2018 को दोपहर 2:40 बजे तक

तुलसी विवाह के दौरान इन बातों का ध्यान जरूर रखना चाहिए।
  1. विवाह के समय तुलसी के पौधे को आंगन,छत या पूजास्थल के बीचोंबीच रखें।
  2. तुलसी का मंडप सजाने के लिए गन्ने का प्रयोग करें।
  3. विवाह के रिवाज शुरू करने से पहले तुलसी के पौधे पर चुनरी जरूर चढ़ाएं।
  4. गमले में शालिग्राम रखकर चावल की जगह तिल चढ़ाएं।
  5. तुलसी और शालिग्राम पर दूध में भीगी हल्दी लगाएं।
  6. अगर विवाह के समय बोला जाने वाला मंगलाष्टक आपको आता है तो वह अवश्य बोलें।
  7. विवाह के दौरान11 बार तुलसी जी की परिक्रमा करें।
  8. प्रसाद को मुख्य आहार के साथ ग्रहण करें और उसका वितरण करें।
  9. पूजा खत्म होने पर घर के सभी सदस्य चारों तरफ से पटिए को उठा कर भगवान विष्णु से जागने का आह्वान करें- उठो देव सांवरा,भाजी, बोर आंवला, गन्ना की झोपड़ी में, शंकर जी की यात्रा।
  10. इस लोक आह्वान का भावार्थ है – हे सांवले सलोने देव,भाजी, बोर, आंवला चढ़ाने के साथ हम चाहते हैं कि आप जाग्रत हों, सृष्टि का कार्यभार संभालें और शंकर जी को पुन: अपनी यात्रा की अनुमति दें।