सावन का तीसरा सोमवार – ये बन रहे हैं सयोंग

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सावन का तीसरा सोमवार – ये बन रहे हैं सयोंग

सावन का महिना, भगवान शिव का प्रिय महिना माना जाता है इसिलिए इस महिनें में भगवान शिव की अराधना करनें की हिंदु धर्म में परंपरा है। हर वर्ष सावन का ये महिना अपने साथ कई सयोंग लेकर आता है। जिनके कारण कुछ दिन अति शुभ माने जाते हैं। सावन के इस पवित्र माह में सोमवार के व्रतों का काफी महत्व माना गया है। इस सावन के दो सोमवार गुजर चुके हैं और आने वाला है तीसरा सोमवार, तीसरा सोमवार अंग्रेजी कलेंडर के हिसाब से 13 अगस्त को आने वाला है। इस बार ये तीसरा सोमवार अपने साथ कुछ सयोंग लेकर आया है जिस से ये खास बन रहा है। तो आईए जानते हैं 2018 के सावन के तीसरे सोमवार के महत्व।

 

                      तीसरे सोमवार के सयोंग

13 अगस्त 2018 को आने वाले सावन के तीसरे सोमवार के दिन महान शिव योग के साथ पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र भी आ रहा है इसके साथ साथ इस दिन मधुस्रावणी पर्व भी है जिसे सौभाग्य कारक माना गया है। माना जाता है कि शिवयोग में शिव की पूजा से भगवान शिव अत्यंत प्रसन्न होते हैं।

 

                      क्या है पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र

भारतीय ज्योतिष शास्त्रों के हिसाब से कुंडली से कि जाने वाली गणनाओं के लिए महत्वपूर्ण माने जाने वाले सताईस नक्षत्रों में से पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र को 11 वां स्थान दिया गया है। इसके साथ साथ बारह आदित्यों में से एक माने जाने वाले भग को वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र का देवता माना गया है। भग को वैदिक ज्योतिष के हिसाब से आनंद, विश्राम, ऐशो आराम और सुख सुविधाओं की विशेषता के रुप में पहचाना जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ही इस नक्षत्र को विवाह कार्यों में कि जाने वाली गुण मिलान की विधि के लिए बड़ा महत्वपूर्ण माना गया है, इसिलिए इस दिन पूजा अर्चना करनें से मनचाहा वर मिलने का आशिर्वाद प्राप्त होता है। इसके साथ ही जिनकी शादी हो चुकी है उन्हे सुखमय दांपत्य का आशिर्वाद भी इस नक्षत्र के में अराधना करने से मिलता है।

 

                           मधुस्रावणी पर्व क्या है

मधुस्रावणी पर्व मिथिलांचल क्षेत्र में सबसे पावन व्रत को कहा जाता है। ये व्रत नवविहाताओं द्वारा रखा जाता है। इस दिन पंद्रह दिन तक चलने वाले मधुस्रावणी व्रत का समापन होता है  इस व्रत की खास बात ये है की नवविवाहिताएं इन पंद्रह दिनों तक केवल अपने ससुराल के दिए वस्त्र और भोजन ही ग्रहण करती हैं। ये व्रत अच्छे दांपत्य जीवन और परिवार में खुशहाली के लिए रखा जाता है। इस व्रत के पीछे मान्यता ये है की मां गौरी नें महादेव को अपने पति के रुप में पाने के लिए काफी वर्षों से कठोर तपस्या की थी।अन्य देवताओं के द्वारा मां गौरी के इस कठोर तपस्या को देख महादेव को गौरी से विवाह करने का आग्रह किये तथा महादेव भी गौरी के कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर मां गौरी से विवाह कर पारिवारिक संबंध में बंध गये। इसी उपलक्ष्य में ये पर्व मनाया जाता है।

 

                          तीसरे सोमवार का महत्व

इन पर्वों के सयोंग के कारण इस सावन का ये तीसरा सोमवार अति महत्वपूर्ण हो जाता है। इस दिन भगवान शिव की अराधना करने से विवाहिताओं को अच्छा दामपत्य सुख और अविवाहितों को सुयोग्य वर मिलने के योग बन रहे हैं। इसलिए इस सोमवार के महत्व को समझते हुए पूरे विधि विधान से व्रत और अराधना करना भी आवश्यक है।

वैदिक पंडित केदार नाथ जी